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हमारा भारत

भारत वर्ष मात्र नदी, पहाड़ों, नगरों, वनों से घिरा हुआ भूभाग मात्र नहीं है।  इसकी पहचान मात्र कुछ वर्षों की नहीं है अपितु लाखों वर्षों से चली आ रही सत्य- सनातन की अपार शक्ति है।समय-समय पर इसमें बहुत सी बातें जुड़ती- घटती गयी पर  मूल स्वरूप के साथ आज भी ये अनवरत अपनी यात्रा  कर रही है। ये हमारी संस्कृति की ही देन है कि हम अपने देश को भारत माता कहते हैं।माता के संबोधन में एक अलग ही भाव छुपा हुआ है।ये भाव ही हमारे देश की मूल पहचान है।हमारी सँस्कृति में हर चराचर को यथोचित स्थान व सम्मान देने की शिक्षा समाहित है।तभी तो हम जीवनदायिनी सरिताओं को माँ का स्थान देते हुए उनकी वंदना करते हैं।हमारा पर्यावरण के प्रति चिंतन व जागरूकता ही रही जो हमारे ऋषि- मुनियों ने इसे पाप- पुण्य से जोड़ते हुए उन सभी कर्मों को पाप की श्रेणी में रखा जो पर्यावरण  के लिए हानिकारक हो सकते थे।पर्यावरण का संरक्षण करने वाले  समस्त कार्यों को पुण्य की श्रेणी में रखा गया। पर्यावरण के प्रति हमारी जागरूकता हमारी सँस्कृति की ही देन है।

ये सँस्कृति ही है जो हमें  सभी का मान- सम्मान करना, आदर देना सिखाती है।सभी जीवों में परमात्मा का दर्शन सिखाती है।हमारे देश में विभिन्न भाषाओं, खानपान, वेशभूषा और संस्कृतियों का समावेश रहा है।कालांतर में होने वाले परिवर्तनों को हमारी सँस्कृति ने सहज स्वीकार किया है।पर इसकी मूल आत्मा सनातन ही है।आज हमारे देश में एक जो कोरोना का संकट आन खड़ा हुआ है।यदि हम उसके बचाव के नियमों को  ध्यान से समझे तो पाएंगे कि ये सारे नियम  तो पहले  से ही हमारे लोकजीवन में पंरपराओं के नाम पर मौजूद रहे हैं। हमारे घर के बड़े बुजुर्ग हमेशा हमसे कहते रहे हैं कि जुते- चप्पल बाहर उतारो। बाहर से आकर कुछ मत छुओ। पहले हाथ- मुँह धो,फिर कुछ छुओ। कोई भी वस्तु बाजार से लाओ तो पहले उसको धो, फिर कुछ समय पश्चात उपयोग करो आदि आदि----। हमारे देश को एकसूत्र में पिरोने वाली कुछ महत्वपूर्ण  कारकों में से एक कारक है  संस्कृत भाषा। संस्कृत भाषा पहले सम्पूर्ण भारत वर्ष में बोली जाती थी। पर समय के कुचक्र के कारण भाषा शनै- शनै क्षीण होती गयी।पर अभी भी लगभग सभी भाषाओं में कुछ शब्द संस्कृत के मिल ही जायेंगे। संस्कृत ही सभी भाषाओं की जननी है।इसी प्रकार पहनावे की बात की जाए तो साड़ी एक ऐसा परिधान है पूर्व से पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक, हर जगह स्त्रीत्व का मान बढ़ाती हुई दिख जायेगी।


गर्व है मुझे हूँ एसे देश की में वासी,

कई तरह के लोग है इस देश के रहवासी;


बड़ा ही अलग ओर अनोखा हमारा हिंदुस्तान,

इस की गौरव गाथा में बसती है सबकी जान;


जुड़े रहते हम हिंदुस्तानी एक दुजे के संग,

हौंसला रहेता हमारा बुलंद चाहे जेसी भी हो जंग;


देश के वीर जवानों की अलग ही है पहचान,

करते रक्षा देश की और बढ़ाते उसकी शान;


ज़ुबान से बयान ना कर पाऊँ देश के प्रति भक्ति,

बेटी हूँ में इस देश की ,मुझ मैं है नारी शक्ति;


दुश्मनों के वार का ऐसा देते कड़ा जवाब,

देश नहीं है ये तो है हमारे गर्व का सबाब;


हमारी ज़िंदादिली है इससे ऐसा इसका मर्म,

भारतीय हूँ में बस इस बात का है मुजे गर्व....


By - 

Nimisha Patel

Anshika Gupta

Asha Jha

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